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JADIBOOTIYA - जड़ीबूटियां

JADIBOOTIYA - जड़ीबूटियां

AYURVEDIC KAPUR - आयुर्वेदिक कपूर- 1 Kg

|| जय चक्रधारी ||आयुर्वेदिक कपूर:-English : Camphor (कैम्पैंर)Sanskrit : कर्पूर, घनसार, चन्द्र, हिमा;Hindi : कपूरUrdu : काफूर (Kafoor)Odia : घोनोसारो (Ghonosaro), कोपूरो (Kopuro)Kannad:  कर्पूर (Karpoor), चन्द्रधवल (Chandradhaval), कामडा (Kamada)Gujrati : कपूर (Kapoor)Telugu : कर्पूरम् (Karpuram), हिमवालुका (Himvaluka), चंद्रुमु (Chandramu)Tamil : कर्पूरम् (Karpuram), कणसारम (Kansaram), सिद्लम (Sidlam)Bengali : कर्पूर (Karpoor)Nepali : कपूर (Kapoor)Marathi : कापूरा (Kapoora)Malyalam : कर्पूरम (Karpooram), हिमांशु (Himanshu), शुभमसु (Subhramasu)।English : कैम्पैंर लॉरेल (Camphor laurel), कैम्पैंर ट्री (Camphor Tree)Arabi: काफूर (Kafoor)Persian : काफूर (Kafur) कपूर (Camphor) का मुख्य इस्तेमाल पूजा के दौरान आरती में किया जाता है। कपूर में काफी तेज गंध होती है और यह एक अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ है। निर्माण की प्रक्रिया के आधार पर और अलग अलग देशों में कपूर के अलग प्रकार मिलते हैं। कपूर रंगहीन, सफेद या पारदर्शी स्वरुप में चूर्ण या चौकोर आकृति का होता है। बहुत कम लोग जानते हैं कपूर का इस्तेमाल कई दवाइयां बनाने में भी किया जाता है। आप अपने घरों में कपूर जरूर जलाते होंगे क्योंकि कपूर जलाने के फायदे बहुत हैं। कई घरों में नारियल तेल और कपूर का एक साथ इस्तेमाल किया जाता है। यह आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद भी होता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से देखें तो कपूर कटु, तिक्त, मधुर और तीक्ष्ण स्वभाव का होता है। यह पाचक की तरह काम करता है और आंखों के लिए फायदेमंद है। हल्का तीखा, सुगन्धित और अधिक पराग वाला कपूर सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।  AYURVEDIC KAPUR:-English : Camphor (कैम्पैंर)Sanskrit : कर्पूर, घनसार, चन्द्र, हिमा;Hindi : कपूरUrdu : काफूर (Kafoor)Odia : घोनोसारो (Ghonosaro), कोपूरो (Kopuro)Kannad:  कर्पूर (Karpoor), चन्द्रधवल (Chandradhaval), कामडा (Kamada)Gujrati : कपूर (Kapoor)Telugu : कर्पूरम् (Karpuram), हिमवालुका (Himvaluka), चंद्रुमु (Chandramu)Tamil : कर्पूरम् (Karpuram), कणसारम (Kansaram), सिद्लम (Sidlam)Bengali : कर्पूर (Karpoor)Nepali : कपूर<..

₹8,500 Ex Tax: ₹8,095

CHANDAN LACCHA-चन्दन लच्छा

 || जय चक्रधारी ||चन्दन लच्छा:-चंदन बेस चक्र के साथ जुड़ा हुआ है। जो पहनने वाले की इंद्रियों को शांत करने के लिए जाना जाता है।  और ध्यान लगाने में मदद करता है।इसका उपयोग नियमित रूप से ललाट पे लगाने के लिए लिए किया जा सकता है, यह पहनने वाले के मस्तिष्क को ठंडक देता है। चंदन की सुगंधित खुशबू भारतीय संस्कृति में सबसे प्यारी खुशबू है।चंदन के लाभ: -1. दिमाग और शरीर को ठंडा रखता है तथा पित्त को शांत रखता है।2. आध्यात्मिक वृद्धि के लिए उपयोग किया जाता है।3. करुणा को बढ़ावा देना और तनाव से राहत देता है।4. शांति और जागरूकता लाता है5. अनुष्ठान को सशक्त बनाना और सभी देवताओं की पूजा करना।6. आंतरिक स्ट्रेंथ और इच्छाशक्ति को बढ़ाता है।7. चंदन स्वागत करने और सम्मान देने के लिए अच्छा है।CHANDAN Laccha:- Chandan is associated with base chakra is known to calm the senses of the wearer and helps to meditate.It can be used to regularly apply over forehead,it gives coolness to the brain of the wearer. The sweer woody fragrance of the chandan is one pf the most beloved scent in the indian culture.Benefits of the chandan or sandalwood:-1. Has a cooling effect on the mind and body and balance pitta.2. Used for spiritual augmentation.3. Promotion compassion and relieves stress.4. Brings peace and awareness5. To empowering rituals and to worship all the deities.6. Enhances inner strenghth and willpower.7. Chandan is good for welcoming and for giving honour.|| ॐ का झंडा ऊँचा रहे || ..

₹951 Ex Tax: ₹849

CHANDAN POWDER - 50 gm - चन्दन पाउडर - 50 gm

 || जय चक्रधारी ||चन्दन पाउडर :-चंदन बेस चक्र के साथ जुड़ा हुआ है। जो पहनने वाले की इंद्रियों को शांत करने के लिए जाना जाता है।  और ध्यान लगाने में मदद करता है।इसका उपयोग नियमित रूप से ललाट पे लगाने के लिए लिए किया जा सकता है, यह पहनने वाले के मस्तिष्क को ठंडक देता है। चंदन की सुगंधित खुशबू भारतीय संस्कृति में सबसे प्यारी खुशबू है।चंदन के लाभ: -1. दिमाग और शरीर को ठंडा रखता है तथा पित्त को शांत रखता है।2. आध्यात्मिक वृद्धि के लिए उपयोग किया जाता है।3. करुणा को बढ़ावा देना और तनाव से राहत देता है।4. शांति और जागरूकता लाता है5. अनुष्ठान को सशक्त बनाना और सभी देवताओं की पूजा करना।6. आंतरिक स्ट्रेंथ और इच्छाशक्ति को बढ़ाता है।7. चंदन स्वागत करने और सम्मान देने के लिए अच्छा है।CHANDAN powder:- Chandan is associated with base chakra is known to calm the senses of the wearer and helps to meditate.It can be used to regularly apply over forehead,it gives coolness to the brain of the wearer. The sweer woody fragrance of the chandan is one pf the most beloved scent in the indian culture.Benefits of the chandan or sandalwood:-1. Has a cooling effect on the mind and body and balance pitta.2. Used for spiritual augmentation.3. Promotion compassion and relieves stress.4. Brings peace and awareness5. To empowering rituals and to worship all the deities.6. Enhances inner strenghth and willpower.7. Chandan is good for welcoming and for giving honour.|| ॐ का झंडा ऊँचा रहे || ..

₹951 Ex Tax: ₹849

CHANDAN WOOD - चन्दन लकड़ी

 || जय चक्रधारी ||चन्दन लकड़ी  :-चंदन बेस चक्र के साथ जुड़ा हुआ है। जो पहनने वाले की इंद्रियों को शांत करने के लिए जाना जाता है।  और ध्यान लगाने में मदद करता है।इसका उपयोग नियमित रूप से ललाट पे लगाने के लिए लिए किया जा सकता है, यह पहनने वाले के मस्तिष्क को ठंडक देता है। चंदन की सुगंधित खुशबू भारतीय संस्कृति में सबसे प्यारी खुशबू है।चंदन के लाभ: -1. दिमाग और शरीर को ठंडा रखता है तथा पित्त को शांत रखता है।2. आध्यात्मिक वृद्धि के लिए उपयोग किया जाता है।3. करुणा को बढ़ावा देना और तनाव से राहत देता है।4. शांति और जागरूकता लाता है5. अनुष्ठान को सशक्त बनाना और सभी देवताओं की पूजा करना।6. आंतरिक स्ट्रेंथ और इच्छाशक्ति को बढ़ाता है।7. चंदन स्वागत करने और सम्मान देने के लिए अच्छा है।CHANDAN wood:- Chandan is associated with base chakra is known to calm the senses of the wearer and helps to meditate.It can be used to regularly apply over forehead,it gives coolness to the brain of the wearer. The sweer woody fragrance of the chandan is one pf the most beloved scent in the indian culture.Benefits of the chandan or sandalwood:-1. Has a cooling effect on the mind and body and balance pitta.2. Used for spiritual augmentation.3. Promotion compassion and relieves stress.4. Brings peace and awareness5. To empowering rituals and to worship all the deities.6. Enhances inner strenghth and willpower.7. Chandan is good for welcoming and for giving honour.|| ॐ का झंडा ऊँचा रहे || ..

₹951 Ex Tax: ₹849

DESI GAAY GOBAR SE NIRMIT KALA DANT MANJAN - देसी गाय गोबर से निर्मित काला दन्त मंजन

|| जय चक्रधारी ||देसी गाय गोबर से निर्मित काला दन्त मंजन:-विशेषज्ञ यही कहते हैं कि, दांतों को रोजाना हमें कम से कम 5 मिनट तो देना ही चाहिए। दातों के रखरखाव के लिए यह जरूरी है। डेंटिस्ट सलाह देते हैं कि, ऐसे प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करें जो आपको दांतों को जरूरी तत्व भी दें। जैसे पहले, कोयला, दातून से दांत साफ किए जाते थे, यह प्राकृतिक चीजें हैं, जिनसे दांतों को पोषक तत्व भी प्राप्त होता था। हमारे प्रोडक्ट्स इन्हीं प्राकृतिक चीजों से मिलकर बनते हैं। यह जरूरी तत्व दांतों तक पहुंचाते हैं। हम चाहते हैं कि लोग फिर शुद्ध उत्पादों की तरफ लौटें। जंक फूड के चलते लोगों की खानेपीने की आदतें बिगड़ चुकी हैं। पहले जैसी मॉर्निंगी एक्टिविटी अब नहीं रही। पहले आयुर्वेदिक उत्पादों का इस्तेमाल होता था। हमारा ये मानना है कि दंत मंचन का उपयोग करने के 7 दिनों में ही संबंधित व्यक्ति को इसका फायदा नजर आने लगता है। मुंह से आने वाली बदबू दूर होती है। अच्छी सुगंध आती है। दिनभर मुंह में एक ताजगी महसूस होती है। DESI GAAY GOBAR SE NIRMIT KALA DANT MANJAN:-Experts say that, we should give at least 5 minutes of teeth daily. This is necessary for the maintenance of teeth. Dentists recommend that you use products that give the necessary ingredients to your teeth. Just like before, teeth were cleaned with coal and datun, these are natural things, which helps the teeth and also gives essential minerals to your teeth. Our products consist of these natural things. So that essential elements reach the teeth.We want people to return to pure products again. People's eating habits have deteriorated due to junk food. The morning activity is no longer the same. Earlier Ayurvedic products were used. We believe that within 7 days of using dental usage the person sees the benefit. Gets rid of the smell which comes from the mouth. There is a freshness in the mouth throughout the day.|| ॐ का झंडा ऊँचा रहे || ..

₹260 Ex Tax: ₹248

HAWAN SAMAGRI - हवन सामग्री

|| जय चक्रधारी || हवन सामग्री:-शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार यज्ञ और हवन दैनिक किए जाने चाहिए।हवन और यज्ञ के दौरान जिन मंत्रों का पाठ किया जाता है, वे हमारे जीवन, कल्याण और संकायों की अध्यक्षता करने वाले दिव्य प्राणियों की आराधना के शक्तिशाली मंत्र हैं।वे स्वास्थ्य, लंबे जीवन और आध्यात्मिक भलाई सुनिश्चित करते हैं। हवन इस प्रकार एक वरदान है।प्राचीन ऋषि अंध विश्वासिस  नहीं थे अपितु ऐसे ही हवन और धार्मिक अनुष्ठान करा करते थे।हवन करते समय व्यक्ति की जो भी इच्छा होती है वह इच्छा पूरी हो जाती है।Hawan samagri:-Yajna and havan should be performed strictly according to the rules laid down in the scriptures.The mantras recited during havan and yajna are powerful chants in adoration of the divine beings who preside over our life, welfare and faculties.They ensure health, long life and spiritual wellbeing. The havan is thus a blessing and boon.The ancient rishis were not blind believers in rituals.Whatever desire a person has when doing the havan that desire is fulfilled.|| ॐ का झंडा ऊँचा रहे || ..

₹550 Ex Tax: ₹550

KUMKUM - कुमकुम

|| जय चक्रधारी ||कुंकुम:- कुंकुम पूजा की अनिवार्य सामग्री है। पूजा के अलावा मांगलिक कार्यां में भी कुंकुम का प्रयोग होता है। यह मनुष्य जीवन का भी अभिन्न हिस्सा है। घर हो या मंदिर सभी जगह पूजा की थाली में कुंकुम रखा जाता है। यह लाल रंग का होता है। लाल रंग प्रेम, उत्साह, उमंग, साहस और शौर्य का प्रतीक है। इससे प्रसन्नता का भी संचार होता है। धर्म ग्रंथों में भी इसे दिव्यता का प्रतीक माना गया है।कुंकुम कान्तिदम दिव्यम् कामिनीकामसंभवम्।अर्थात - कुंकुम अनंत कांति प्रदान करने वाला पवित्र पदार्थ है जो स्त्रियों की संपूर्ण कामनाओं को पूरा करने वाला है।लोक व्यवहार में भी कुंकुम का उपयोग होता है। पुरुष तिलक और महिलाएं कुंकुम की बिंदिया लगाती हैं। प्राचीनकाल में जब राजा युद्ध के लिए जाते थे तो उन्हें विजय लक्ष्मी के लिए प्रतीक के रूप..

₹451 Ex Tax: ₹430

NATURAL BAJRANGI SINDUR - प्राकर्तिक बजरंगी सिंदूर

|| जय चक्रधारी ||प्राकर्तिक बजरंगी सिंदूर:-  बात करेंगे सिन्दूर पर | हर स्त्री अपने जीवन में कभी न कभी मांग भरती है | मांग भरने की प्रथा - माता सीता से आरम्भ होती है | माता सीता से हनुमान जी ने जब प्रश्न किया, के आप मांग क्यों भरती हैं सिन्दूर से ? तो उत्तर यही मिला के इससे श्री राम की आयु लम्बी तो होती है | बस इतना सुनते ही - बजरंग बलि ने अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर रमा लिया | और मान्यता कहती है - के जीवन का कोई भी कष्ट हो, बजरंगबली को सिन्दूर चढाने से समाप्त हो जाता है | अब बात आती है सिन्दूर की - कहते हैं - सिन्दूर का टीका लगाओ तो आँख में नहीं जाना चाहिए - अन्यथा यह अँधा कर देगा आप तनिक सोचिये - के क्या जो वास्तु बजरंगबली को अर्पित की जाएगी, जो किसी की नेत्र ज्योति ले सकती है?? क्या ऐसी विषैली वस्तु माता सीता उपयोग में लेती थी ? तो जानिये - आज बाजार में सिन्दूर - सीसे से बनता है, साथ ही सिंगरफ के चूरे का प्रयोग किया जाता है | यह आपको अँधा करने में निश्चित सक्षम है | क्युकी यह है - " नकली सिन्दूर " | यह विष है जो गलती से मुँह में चला जाये तो मार भी सकता है | इस सिन्दूर को आप भर मचक कर - हनुमान मंदिर में अर्पित करते हैं | यह हो क्या रहा है इस देश में आश्चर्य है | सिन्दूर कैसे आता है यह जानने से पहले यह भी जान लीजिये - के स्त्री यदि सिन्दूर मांग में लगाती है - तो पति की आयु कैसे बढ़ती है ? होता ऐसा है - पति के पल पल का हाल - उसकी पत्नी देखती है | जैसे एक मान में ममता होती है वैसे ही पत्नी में प्रेम होता है | जब वही पत्नी स्वस्थ रहेगी तो पति का ध्यान रख पायेगी - और इस प्रकार निश्चित ही पति की आयु लम्बी होगी ही होगी | सिन्दूर - पैदा होता है पेड़ पर | उस पेड़ को - जंगली सिन्दूर नाम से जाना जाता है, वही इसे "कमीला जतन" नाम से भी पहचाना जाता है | इसमें - कड़े से कड़े चर्म रोग को समाप्त करने की ताकत है, इसमें ताकत है सभी स्त्री रोगों को जड़ से समाप्त करने की | इसमें ऊर्जा है - पाचन तंत्र को बहुत सुदृढ़ करने की, और इसमें ऐसा चमत्कार है के - किसी को भी "कृमि रोग" ही न होने देवे | मात्र - ब्रह्मरन्द्र (स्त्रियों को मांग लगाने का स्थान ) पर लगाने से - उपरोक्त समस्या समाप्त हो जाती है | यह है मेरा भारत | यह है सनातन धर्म | और आज देखो क्या हो रहा है - कम्पनिया नकली सिन्दूर बना बना कर बाजार में हमारे देश की स्त्रियों को पागल बना रही हैं, वो भी कितने ही वर्षों से | बाजार में मिलने वाला नकली सिन्दूर, सीसे और सिंगरफ चूरे से बने सिन्दूर से भी अधिक घातक है | यही वह कारण है, जिसके चलते - स्त्रियों को "ब्रैस्ट कैंसर" होता है | यही वो कारण हैं जिसके चलते - स्त्रियों को एक आयु में आकर - शरीर से - "बच्चे दानी" को निकलवाना पड़ता है | यही वह कारण हैं - जो किसी भी स्त्री का स्वाभाव चिड़चिड़ा बना देता है| यही वो कारण है के हमारी माताएं बीमार हो जाती हैं | यदि यह लेख पढ़ कर थोड़ी भी जाग्रति आयी हो, तो आज ही अपने भारत की सभय्ता को पुनर्जीवित करने की पहल में हमारा साथ देवें| || ॐ का झंडा ऊँचा रहे || ..

₹600 Ex Tax: ₹571

NATURAL SUHAGIN SINDUR - प्राकर्तिक सुहागिन सिंदूर

|| जय चक्रधारी ||प्राकर्तिक सुहागिन सिंदूर:-  बात करेंगे सिन्दूर पर | हर स्त्री अपने जीवन में कभी न कभी मांग भरती है | मांग भरने की प्रथा - माता सीता से आरम्भ होती है | माता सीता से हनुमान जी ने जब प्रश्न किया, के आप मांग क्यों भरती हैं सिन्दूर से ? तो उत्तर यही मिला के इससे श्री राम की आयु लम्बी तो होती है | बस इतना सुनते ही - बजरंग बलि ने अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर रमा लिया | और मान्यता कहती है - के जीवन का कोई भी कष्ट हो, बजरंगबली को सिन्दूर चढाने से समाप्त हो जाता है | अब बात आती है सिन्दूर की - कहते हैं - सिन्दूर का टीका लगाओ तो आँख में नहीं जाना चाहिए - अन्यथा यह अँधा कर देगा आप तनिक सोचिये - के क्या जो वास्तु बजरंगबली को अर्पित की जाएगी, जो किसी की नेत्र ज्योति ले सकती है?? क्या ऐसी विषैली वस्तु माता सीता उपयोग में लेती थी ? तो जानिये - आज बाजार में सिन्दूर - सीसे से बनता है, साथ ही सिंगरफ के चूरे का प्रयोग किया जाता है | यह आपको अँधा करने में निश्चित सक्षम है | क्युकी यह है - " नकली सिन्दूर " | यह विष है जो गलती से मुँह में चला जाये तो मार भी सकता है | इस सिन्दूर को आप भर मचक कर - हनुमान मंदिर में अर्पित करते हैं | यह हो क्या रहा है इस देश में आश्चर्य है | सिन्दूर कैसे आता है यह जानने से पहले यह भी जान लीजिये - के स्त्री यदि सिन्दूर मांग में लगाती है - तो पति की आयु कैसे बढ़ती है ? होता ऐसा है - पति के पल पल का हाल - उसकी पत्नी देखती है | जैसे एक मान में ममता होती है वैसे ही पत्नी में प्रेम होता है | जब वही पत्नी स्वस्थ रहेगी तो पति का ध्यान रख पायेगी - और इस प्रकार निश्चित ही पति की आयु लम्बी होगी ही होगी | सिन्दूर - पैदा होता है पेड़ पर | उस पेड़ को - जंगली सिन्दूर नाम से जाना जाता है, वही इसे "कमीला जतन" नाम से भी पहचाना जाता है | इसमें - कड़े से कड़े चर्म रोग को समाप्त करने की ताकत है, इसमें ताकत है सभी स्त्री रोगों को जड़ से समाप्त करने की | इसमें ऊर्जा है - पाचन तंत्र को बहुत सुदृढ़ करने की, और इसमें ऐसा चमत्कार है के - किसी को भी "कृमि रोग" ही न होने देवे | मात्र - ब्रह्मरन्द्र (स्त्रियों को मांग लगाने का स्थान ) पर लगाने से - उपरोक्त समस्या समाप्त हो जाती है | यह है मेरा भारत | यह है सनातन धर्म | और आज देखो क्या हो रहा है - कम्पनिया नकली सिन्दूर बना बना कर बाजार में हमारे देश की स्त्रियों को पागल बना रही हैं, वो भी कितने ही वर्षों से | बाजार में मिलने वाला नकली सिन्दूर, सीसे और सिंगरफ चूरे से बने सिन्दूर से भी अधिक घातक है | यही वह कारण है, जिसके चलते - स्त्रियों को "ब्रैस्ट कैंसर" होता है | यही वो कारण हैं जिसके चलते - स्त्रियों को एक आयु में आकर - शरीर से - "बच्चे दानी" को निकलवाना पड़ता है | यही वह कारण हैं - जो किसी भी स्त्री का स्वाभाव चिड़चिड़ा बना देता है| यही वो कारण है के हमारी माताएं बीमार हो जाती हैं | यदि यह लेख पढ़ कर थोड़ी भी जाग्रति आयी हो, तो आज ही अपने भारत की सभय्ता को पुनर्जीवित करने की पहल में हमारा साथ देवें| || ॐ का झंडा ऊँचा रहे || ..

₹450 Ex Tax: ₹429

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