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Shaligram Stones - शालिग्राम पत्थर

CHAKRA SHALIGRAM - चक्र शालिग्राम

|| जय चक्रधारी ||चक्र शालिग्राम:-शालीग्राम जी का प्रयोग परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में भगवान का आह्वान करने के लिए किया जाता है। शालीग्राम आमतौर पर पवित्र नदी की तली या किनारों से एकत्र किये जाता है।  पुराणों के अनुसार भगवान के इस विग्रह रूप की ही पूजा की जानी चाहिए। शिवलिंग जहां भगवान शंकर का प्रतीक है तो शालिग्राम भगवान विष्णु का।शिवलिंग की तरह शालिग्राम भी बहुत दुर्लभ है। अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गण्डकी नदी के तट पर पाया जाता है। काले और भूरे शालिग्राम के अलावा सफेद, नीले और ज्योतियुक्त शालिग्राम का पाया जाना तो और भी दुर्लभ है। पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है।शालिग्राम जी के प्रकार : -विष्णु के अवतारों के अनुसार शालिग्राम पाया जाता है। यदि गोल शालिग्राम है तो वह विष्णु का रूप गोपाल है।यदि शालिग्राम मछली के आकार का है तो यह श्री विष्णु के मत्स्य अवतार का प्रतीक है।यदि शालिग्राम कछुए के आकार का है तो यह भगवान के कच्छप और कूर्म अवतार का प्रतीक है। इसके अलावा शालिग्राम पर उभरने वाले चक्र और रेखाएं भी विष्णु के अन्य अवतारों और श्रीकृष्ण के कुल के लोगों को इंगित करती हैं। इस तरह लगभग 33 प्रकार के शालिग्राम होते हैं जिनमें से 24 प्रकार को विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना गया है।माना जाता है कि ये सभी 24 शालिग्राम वर्ष की 24 एकादशी व्रत से संबंधित हैं।शालिग्राम जी की पूजा:-1. घर में सिर्फ एक ही शालिग्राम की पूजा करनी चाहिए।2.विष्णु की मूर्ति से कहीं ज्यादा उत्तम है शालिग्राम की पूजा करना।3.शालिग्राम पर चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है।4.प्रतिदिन शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराया जाता है।5.जिस घर में शालिग्राम का पूजन होता है  6.उस घर में लक्ष्मी का सदैव वास रहता है।* शालिग्राम पूजन करने से अगले-पिछले सभी जन्मों के पाप  नष्ट हो जाते हैं।7.शालिग्राम सात्विकता के प्रतीक हैं। उनके पूजन में आचार-विचार की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।8.तुलसी की जड़ के पास शालिग्राम (एक पत्थर) रखकर रोज पूजा करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। SHALIGRAM ji:-Shaligram Ji I represents God. Shaligram is usually collected from the bottom or banks of the holy river. According to the Puranas, only this deity form of God should be worshiped. While the Shivling is the symbol of Lord Shankar, then the Shaligram  is of Lord Vishnu.Shaligram like Shivling is also very rare. Mostly Shaligramis found on the banks of the Kali Gandaki River, Muktinath in Nepal. Apart fromblack and brown saligrams, it is rare to find white, blue and lightedsaligrams. In the complete Shaligram, the shape of the wheel of Lord Vishnu isinscribed.Types of Shaligram Ji: -According to the incarnations of Vishnu, Shaligram is found. If spherical is Shaligram, then it  is Gopala, form of Vishnu.If the Shaligram is in the shape of a fish then it symbolizes the Matsya avatar of Shri Vishnu.If the Shaligram is in the shape of a turtle, it is a symbolof the Kachchhap and Koram avatar of God. Apart from this, the chakras and lines emerging on the Shaligram also indicate other incarnations of Vishnu and the clan of Shri Krishna.In this way, there are about 33 types of Shaligrams, out of which 24 types are considered to be related to 24 incarnations of Vishnu.It is believed that all these 24 shaligrams are related tothe 24 Ekadashi fast of the year. Worship of Shaligram Ji: -1. Only one Shaligram should be worshiped at home. 2. Worshiping Shaligram is better than the idol of Vishnu.3. After applying sandalwood on Saligram, a basil leaf is placed on it.4. Every day Shaligram is bathed with Panchamrit.5. The house where Shaligram is worshiped, lakshmi always lives in that house.6. Worshiping Shaligram eliminates the sins of all previous lives.7. Shaligram is the symbol of Satvikta. Special attention is taken to the purity of ethics in their worship. 8. The tradition of worshiping Shaligram near the root of Tulasi has been going on since old times. || ॐ का झंडा ऊँचा रहे ||  ..

₹630 Ex Tax: ₹600

KASAUTI CHATTAN TUKDE - कसौटी चट्टान टुकड़े

|| जय चक्रधारी ||कसौटी चट्टान टुकड़े:-कसौटि को touchstone भी कहा जाता है। यह एक छोटा, गहरा रंग का  पत्थर होता है, जो स्वर्ण आदि मूल्यवान धातुओं को परखने के काम आती है। यह अत्यन्त चिकना होता है इस पर धातु  को रगड़ने से  निशान बन जाता है। स्वर्ण और मिश्रधातुएँ कसौटी पर अलग-अलग रंग का निशान बनाती हैं, इस आधार पर स्वर्ण की शुद्धता एवं अशुद्धता का आकलन किया जा सकता है। यह विधि प्राचीन काल से उपयोग में लायी जाती रही है। निशान के ऊपर समुचित सांद्रता का नाइट्रिक अम्ल या अम्लराज (aqua regia) डालने पर अलग अलग अभिक्रिया प्राप्त होती है जिससे स्वर्ण की शुद्धता का अन्दाजा हो जाता है। उदाहरण के लिये 24 कैरेट सोना से बना निशान अपरिवर्तित रहेगा जबकि 14 कैरेट सोना से बना निशान अभिक्रिया करेगा और उसमें बदलाव दिखेगा। KASAUTI CHATTAN TUKDE:-This stone is also called as touch stone. It is a small, dark colored stone, which is used for  the testing of precious metals like gold.It is very moist, smooth, rubbing the metal on it becomes a mark on it.Gold and alloys makes different mark colors on the kasauti stone,On this basis,the purity and impurity of gold can be estimated.This method has been used since ancient times. Different reactions are obtained by putting nitric acid or aqua regia at the appropriate concentration above the mark, which gives an idea of ​​the purity of the gold. For example, a mark made of 24 carat gold will remain unchanged while a mark made of 14 carat gold will react and change.|| ॐ का झंडा ऊँचा रहे || ..

₹1,404 Ex Tax: ₹1,400

LOCKET SHALIGRAM - लटकन शालिग्राम

|| जय चक्रधारी ||लटकन शालिग्राम:-शालीग्राम जी का प्रयोग परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में भगवान का आह्वान करने के लिए किया जाता है। शालीग्राम आमतौर पर पवित्र नदी की तली या किनारों से एकत्र किये जाता है।  पुराणों के अनुसार भगवान के इस विग्रह रूप की ही पूजा की जानी चाहिए। शिवलिंग जहां भगवान शंकर का प्रतीक है तो शालिग्राम भगवान विष्णु का।शिवलिंग की तरह शालिग्राम भी बहुत दुर्लभ है। अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गण्डकी नदी के तट पर पाया जाता है। काले और भूरे शालिग्राम के अलावा सफेद, नीले और ज्योतियुक्त शालिग्राम का पाया जाना तो और भी दुर्लभ है। पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है।शालिग्राम जी के प्रकार : -विष्णु के अवतारों के अनुसार शालिग्राम पाया जाता है। यदि गोल शालिग्राम है तो वह विष्णु का रूप गोपाल है।यदि शालिग्राम मछली के आकार का है तो यह श्री विष्णु के मत्स्य अवतार का प्रतीक है।यदि शालिग्राम कछुए के आकार का है तो यह भगवान के कच्छप और कूर्म अवतार का प्रतीक है। इसके अलावा शालिग्राम पर उभरने वाले चक्र और रेखाएं भी विष्णु के अन्य अवतारों और श्रीकृष्ण के कुल के लोगों को इंगित करती हैं। इस तरह लगभग 33 प्रकार के शालिग्राम होते हैं जिनमें से 24 प्रकार को विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना गया है।माना जाता है कि ये सभी 24 शालिग्राम वर्ष की 24 एकादशी व्रत से संबंधित हैं।शालिग्राम जी की पूजा:-1. घर में सिर्फ एक ही शालिग्राम की पूजा करनी चाहिए।2.विष्णु की मूर्ति से कहीं ज्यादा उत्तम है शालिग्राम की पूजा करना।3.शालिग्राम पर चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है।4.प्रतिदिन शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराया जाता है।5.जिस घर में शालिग्राम का पूजन होता है  6.उस घर में लक्ष्मी का सदैव वास रहता है।* शालिग्राम पूजन करने से अगले-पिछले सभी जन्मों के पाप  नष्ट हो जाते हैं।7.शालिग्राम सात्विकता के प्रतीक हैं। उनके पूजन में आचार-विचार की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।8.तुलसी की जड़ के पास शालिग्राम (एक पत्थर) रखकर रोज पूजा करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। LOCKET SHALIGRAM ji:-Shaligram Ji I represents God. Shaligram is usually collected from the bottom or banks of the holy river. According to the Puranas, only this deity form of God should be worshiped. While the Shivling is the symbol of Lord Shankar, then the Shaligram  is of Lord Vishnu.Shaligram like Shivling is also very rare. Mostly Shaligramis found on the banks of the Kali Gandaki River, Muktinath in Nepal. Apart fromblack and brown saligrams, it is rare to find white, blue and lightedsaligrams. In the complete Shaligram, the shape of the wheel of Lord Vishnu isinscribed.Types of Shaligram Ji: -According to the incarnations of Vishnu, Shaligram is found. If spherical is Shaligram, then it  is Gopala, form of Vishnu.If the Shaligram is in the shape of a fish then it symbolizes the Matsya avatar of Shri Vishnu.If the Shaligram is in the shape of a turtle, it is a symbolof the Kachchhap and Koram avatar of God. Apart from this, the chakras and lines emerging on the Shaligram also indicate other incarnations of Vishnu and the clan of Shri Krishna.In this way, there are about 33 types of Shaligrams, out of which 24 types are considered to be related to 24 incarnations of Vishnu.It is believed that all these 24 shaligrams are related tothe 24 Ekadashi fast of the year. Worship of Shaligram Ji: -1. Only one Shaligram should be worshiped at home. 2. Worshiping Shaligram is better than the idol of Vishnu.3. After applying sandalwood on Saligram, a basil leaf is placed on it.4. Every day Shaligram is bathed with Panchamrit.5. The house where Shaligram is worshiped, lakshmi always lives in that house.6. Worshiping Shaligram eliminates the sins of all previous lives.7. Shaligram is the symbol of Satvikta. Special attention is taken to the purity of ethics in their worship. 8. The tradition of worshiping Shaligram near the root of Tulasi has been going on since old times. || ॐ का झंडा ऊँचा रहे || ..

₹473 Ex Tax: ₹450

NARAMDESHWAR LINGAM - नर्मदेश्वर लिंगम

|| जय चक्रधारी ||नर्मदेश्वर  लिंगम:-आप सब ने बहुत से शिवलिंग के बारे में सुना होगा| शिवलिंग भगवान शिव का रूप माना जाता है और उस की पूजा भी होती है| ऐसे ही शिवलिंग बहुत प्रकार के होते है और हर किसी का अपना रहस्य है| आइये जानते है की नर्मदेश्वर शिवलिंग का क्या सच है| नर्मदेश्वर शिवलिंग इस धरती पर केवल नर्मदा नदी में ही पाए जाते हैं। इस शिवलिंग का नाम में भी आपको नदी का ज्ञात होता है| इस शिवलिग का नाम नर्मदा नदीसे पढ़ा था|नर्मदेश्वर शिवलिंग इस धरती पर केवल नर्मदा नदी में ही पाए जाते हैं। यह स्वयंभू शिवलिंग हैं। इसमें निर्गुण, निराकार ब्रह्म भगवान शिव स्वयं प्रतिष्ठित हैं। नर्मदेश्वर लिंग शालग्रामशिला की तरह स्वप्रतिष्ठित माने जाते हैं, इनमें प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं रहती है। नर्मदेश्वर शिवलिंग को वाणलिंग इसलिए कहते है|  क्योंकि बाणासुर ने तपस्या करके महादेवजी से वर पाया था कि वे अमरकंटक पर्वत पर सदा लिंगरूप में प्रकट रहें। इसी पर्वत से नर्मदा नदी निकलती है जिसके साथ पर्वत से पत्थर बहकर आते हैं| इसलिए वे पत्थर शिवस्वरूप माने जाते हैं और उन्हें ‘बाणलिंग’ व ‘नर्मदेश्वर’ कहते हैं।  वैसे तो भगवान शिव हर किसी को अच्चा फल देते है लेकिन सहस्त्रों धातुलिंगों के पूजन का जो फल होता है उससे अधिक मिठा फल  नर्मदेश्वर शिवलिंग  के पूजन करने से होता है। हजारों मिट्टी के लिंगों के पूजन का जो फल होता है उससे सौ गुना अधिक फल बाणलिंग (नर्मदेश्वर) के पूजन से होता है। लोगों को परिवार के कल्याण के लिए, लक्ष्मी व ज्ञान और धनवान बानने के लिए या अपने दुखों का निवारण करने के लिए प्राप्ति व रोगों के नाश के लिए नर्मदेश्वर शिवलिंग की प्रतिदिन पूजा करनी चाहिए।|| ॐ का झंडा ऊँचा रहे || ..

₹264 Ex Tax: ₹251

SUDARSHAN SHALIGRAM - सुदर्शन शालिग्राम

|| जय चक्रधारी ||सुदर्शन शालिग्राम:-शालीग्राम जी का प्रयोग परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में भगवान का आह्वान करने के लिए किया जाता है। शालीग्राम आमतौर पर पवित्र नदी की तली या किनारों से एकत्र किये जाता है।  पुराणों के अनुसार भगवान के इस विग्रह रूप की ही पूजा की जानी चाहिए। शिवलिंग जहां भगवान शंकर का प्रतीक है तो शालिग्राम भगवान विष्णु का।शिवलिंग की तरह शालिग्राम भी बहुत दुर्लभ है। अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गण्डकी नदी के तट पर पाया जाता है। काले और भूरे शालिग्राम के अलावा सफेद, नीले और ज्योतियुक्त शालिग्राम का पाया जाना तो और भी दुर्लभ है। पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है।शालिग्राम जी के प्रकार : -विष्णु के अवतारों के अनुसार शालिग्राम पाया जाता है। यदि गोल शालिग्राम है तो वह विष्णु का रूप गोपाल है।यदि शालिग्राम मछली के आकार का है तो यह श्री विष्णु के मत्स्य अवतार का प्रतीक है।यदि शालिग्राम कछुए के आकार का है तो यह भगवान के कच्छप और कूर्म अवतार का प्रतीक है। इसके अलावा शालिग्राम पर उभरने वाले चक्र और रेखाएं भी विष्णु के अन्य अवतारों और श्रीकृष्ण के कुल के लोगों को इंगित करती हैं। इस तरह लगभग 33 प्रकार के शालिग्राम होते हैं जिनमें से 24 प्रकार को विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना गया है।माना जाता है कि ये सभी 24 शालिग्राम वर्ष की 24 एकादशी व्रत से संबंधित हैं।शालिग्राम जी की पूजा:-1. घर में सिर्फ एक ही शालिग्राम की पूजा करनी चाहिए।2.विष्णु की मूर्ति से कहीं ज्यादा उत्तम है शालिग्राम की पूजा करना।3.शालिग्राम पर चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है।4.प्रतिदिन शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराया जाता है।5.जिस घर में शालिग्राम का पूजन होता है  6.उस घर में लक्ष्मी का सदैव वास रहता है।* शालिग्राम पूजन करने से अगले-पिछले सभी जन्मों के पाप  नष्ट हो जाते हैं।7.शालिग्राम सात्विकता के प्रतीक हैं। उनके पूजन में आचार-विचार की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।8.तुलसी की जड़ के पास शालिग्राम (एक पत्थर) रखकर रोज पूजा करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। SUDARSHAN SHALIGRAM ji:-Shaligram Ji I represents God. Shaligram is usually collected from the bottom or banks of the holy river. According to the Puranas, only this deity form of God should be worshiped. While the Shivling is the symbol of Lord Shankar, then the Shaligram  is of Lord Vishnu.Shaligram like Shivling is also very rare. Mostly Shaligramis found on the banks of the Kali Gandaki River, Muktinath in Nepal. Apart fromblack and brown saligrams, it is rare to find white, blue and lightedsaligrams. In the complete Shaligram, the shape of the wheel of Lord Vishnu isinscribed.Types of Shaligram Ji: -According to the incarnations of Vishnu, Shaligram is found. If spherical is Shaligram, then it  is Gopala, form of Vishnu.If the Shaligram is in the shape of a fish then it symbolizes the Matsya avatar of Shri Vishnu.If the Shaligram is in the shape of a turtle, it is a symbolof the Kachchhap and Koram avatar of God. Apart from this, the chakras and lines emerging on the Shaligram also indicate other incarnations of Vishnu and the clan of Shri Krishna.In this way, there are about 33 types of Shaligrams, out of which 24 types are considered to be related to 24 incarnations of Vishnu.It is believed that all these 24 shaligrams are related tothe 24 Ekadashi fast of the year. Worship of Shaligram Ji: -1. Only one Shaligram should be worshiped at home. 2. Worshiping Shaligram is better than the idol of Vishnu.3. After applying sandalwood on Saligram, a basil leaf is placed on it.4. Every day Shaligram is bathed with Panchamrit.5. The house where Shaligram is worshiped, lakshmi always lives in that house.6. Worshiping Shaligram eliminates the sins of all previous lives.7. Shaligram is the symbol of Satvikta. Special attention is taken to the purity of ethics in their worship. 8. The tradition of worshiping Shaligram near the root of Tulasi has been going on since old times. || ॐ का झंडा ऊँचा रहे || ..

₹2,363 Ex Tax: ₹2,250

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